मुझे पता था तुम नहीं समझोगे
और समझाना भी मुझे कुछ नहीं था
अब तो सोते होगे अच्छे से ना
हाथ में दर्द भी नहीं रहता होगा
क्योंकि अब तुम्हारी बाँह पर सर रख कर नहीं सोती मैं
तुम्हारी नींद भी नहीं खुलती होगी
क्योंकि अब मेरे बाल तुम्हारी नाक में नहीं जाते होंगे
खाना भी अच्छा मिलता होगा न तुम्हें
क्योंकि अब मैं जो नहीं बनाती
खुश रहते होगे न तुम अब
क्योंकि मैं अब झगड़ती नहीं तुमसे
घर भी समय पर ही आ जाते होगे
अब मैं तुम्हारा इंतज़ार जो नहीं करती
सुनो, मेरे कान की बालियां शायद अब भी वहीँ पड़ी हैं
तुम्हारे तकिये के नीचे
और हाँ पता है मेरे कम्बल से अब भी तुम्हारी ख़ुश्बू आती थी
कम्बल तो मैंने जला दिया कल रात
पर तुम मेरी बालियां फेंकना नहीं
रखना हमेशा
अपने पास.
और समझाना भी मुझे कुछ नहीं था
अब तो सोते होगे अच्छे से ना
हाथ में दर्द भी नहीं रहता होगा
क्योंकि अब तुम्हारी बाँह पर सर रख कर नहीं सोती मैं
तुम्हारी नींद भी नहीं खुलती होगी
क्योंकि अब मेरे बाल तुम्हारी नाक में नहीं जाते होंगे
खाना भी अच्छा मिलता होगा न तुम्हें
क्योंकि अब मैं जो नहीं बनाती
खुश रहते होगे न तुम अब
क्योंकि मैं अब झगड़ती नहीं तुमसे
घर भी समय पर ही आ जाते होगे
अब मैं तुम्हारा इंतज़ार जो नहीं करती
सुनो, मेरे कान की बालियां शायद अब भी वहीँ पड़ी हैं
तुम्हारे तकिये के नीचे
और हाँ पता है मेरे कम्बल से अब भी तुम्हारी ख़ुश्बू आती थी
कम्बल तो मैंने जला दिया कल रात
पर तुम मेरी बालियां फेंकना नहीं
रखना हमेशा
अपने पास.
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