हाँ उसी मीना बाज़ार में
झुमके की दुकानों पे भाग रहा हूँ
तुम्हारी हँसी की आवाजों को
सहेजने की कोशिश में
भेस बदल बदल कर
जाता हूँ हर बार वहीँ
तुमने हँसते हुए
ख़ुद को देखा था जिनमें
उन आइनों को खरीदने की कोशिश में
वो चौकीदार मुझे चोर समझता है
उसे भी क्या पता
की मैं आता हूँ अपना ही कुछ
सामान समेटने की कोशिश में
Monday, October 26, 2009
Sunday, October 4, 2009
खूबसूरत मोरनी
सुना है की
मोरनी बदसूरत होती है
और मोर खूबसूरत
मगर नाचता मोर है
मोरनी के इशारों पर
सोच ही रहा था की अगर
मोरनी खूबसूरत होती
तो मोर का क्या होता
तभी पीछे से आवाज़ आई
एक पैर पर नाचो
और मैं नाचने लगा
मोरनी बदसूरत होती है
और मोर खूबसूरत
मगर नाचता मोर है
मोरनी के इशारों पर
सोच ही रहा था की अगर
मोरनी खूबसूरत होती
तो मोर का क्या होता
तभी पीछे से आवाज़ आई
एक पैर पर नाचो
और मैं नाचने लगा
फूल और कांटे पार्ट 2
तुम्हारे जाने के बाद भी
मैं रोज़ उसी तरह
वो बैंगनी फूल लेकर
वहां आता था
अकेला बैठता ऊँघता रहता था
सारे पंछी मुझपर हँसते थे
हवाएं नाराज़ होकर
मुझे ठोकर मारती थीं
मुझे भगाने के लिए सूरज
अपनी धूप और तेज़ कर देता
फ़िर वो ही थक कर लौट जाता था
कभी चाँद मुझे डराने के लिए
बादलों के पीछे छिप जाता था
एक बार गुस्से में मैंने
चाकू से कांटे निकलने की
कोशिश भी की थी
कांटे तो अब भी वहीँ धंसे हैं
मगर हाथों की लकीरें
कुछ बदल सी गई हैं
मैं रोज़ उसी तरह
वो बैंगनी फूल लेकर
वहां आता था
अकेला बैठता ऊँघता रहता था
सारे पंछी मुझपर हँसते थे
हवाएं नाराज़ होकर
मुझे ठोकर मारती थीं
मुझे भगाने के लिए सूरज
अपनी धूप और तेज़ कर देता
फ़िर वो ही थक कर लौट जाता था
कभी चाँद मुझे डराने के लिए
बादलों के पीछे छिप जाता था
एक बार गुस्से में मैंने
चाकू से कांटे निकलने की
कोशिश भी की थी
कांटे तो अब भी वहीँ धंसे हैं
मगर हाथों की लकीरें
कुछ बदल सी गई हैं
परियों की कहानी
माँ मुझे याद नहीं
की तुमने बचपन में
मुझे कहानीयां सुनाई थी या नहीं
पर इस बार घर आकर तुमसे
सुनूंगा कहानियाँ
परियों की
शायद तुम्हारी कहानी की परियाँ
कुछ अलग हो
उन्हें प्यार करना आता हो
शायद उन्हें भावनाओं की समझ हो
मैं जानता हूँ माँ
तुम मेरा दिल नहीं तोड़ सकती
की तुमने बचपन में
मुझे कहानीयां सुनाई थी या नहीं
पर इस बार घर आकर तुमसे
सुनूंगा कहानियाँ
परियों की
शायद तुम्हारी कहानी की परियाँ
कुछ अलग हो
उन्हें प्यार करना आता हो
शायद उन्हें भावनाओं की समझ हो
मैं जानता हूँ माँ
तुम मेरा दिल नहीं तोड़ सकती
कल रात
सितारों ने टिमटिमा के
रात भर सोने नहीं दिया
चाँद भी रुंधे गले से
आवाज़ लगता रहा मुझे
आसमान भी रोया है
कल रात भर
सुना है कहीं बाढ़ आई है
रात भर सोने नहीं दिया
चाँद भी रुंधे गले से
आवाज़ लगता रहा मुझे
आसमान भी रोया है
कल रात भर
सुना है कहीं बाढ़ आई है
उड़ती कहानी
कल रात अपनी कहानी को पंख लगाया था
उड़ाने की कोशिश कर रहा था
मगर वो नहीं उड़ी
मैंने उसके पंख उतार के
वापस दराज में रख दिए
फ़िर जैसे ही तुमने कहा
अपनी कहानी सुनाओ
वो उड़ गई
बिना पंखों के
आज सुबह दिखी थी मुझे
तुम्हारी मुंडेर पे
मुझे देख कर इतरा रही थी
या शायद पहचानने की कोशिश
मैंने भी झुंझलाकर उसे पत्थर मारा
वो आसमान में पड़ा सुराख़
दिखेगा तुम्हें रात को
कहानी मिल जाए तो मुझे
दे जाना
पिंजरे में रखूँगा उसको
उड़ाने की कोशिश कर रहा था
मगर वो नहीं उड़ी
मैंने उसके पंख उतार के
वापस दराज में रख दिए
फ़िर जैसे ही तुमने कहा
अपनी कहानी सुनाओ
वो उड़ गई
बिना पंखों के
आज सुबह दिखी थी मुझे
तुम्हारी मुंडेर पे
मुझे देख कर इतरा रही थी
या शायद पहचानने की कोशिश
मैंने भी झुंझलाकर उसे पत्थर मारा
वो आसमान में पड़ा सुराख़
दिखेगा तुम्हें रात को
कहानी मिल जाए तो मुझे
दे जाना
पिंजरे में रखूँगा उसको
रिक्शेवाला और पुलिसवाला
रिक्शेवाला रात को सुनसान सड़क पे
नशे में हल्ला मचा रहा था
कहीं से एक पुलिसवाला आया
वो भी नशे में
उसे मारने और चिल्लाने लगा
रिक्शेवाले ने रोते हुए धीरे से कहा
साहब अपनी कमाई के पैसों
की पीकर चिल्ला रहा हूँ
पुलिसवाले ने चुप होकर उसे और मारा
नशे में हल्ला मचा रहा था
कहीं से एक पुलिसवाला आया
वो भी नशे में
उसे मारने और चिल्लाने लगा
रिक्शेवाले ने रोते हुए धीरे से कहा
साहब अपनी कमाई के पैसों
की पीकर चिल्ला रहा हूँ
पुलिसवाले ने चुप होकर उसे और मारा
कफ़न अपना अपना
ख़बर आई थी की पड़ोसी का बेटा
शहीद हुआ है सीमा पर
और दूसरी ख़बर भी थी
की काम वाली बाई का बेटा
सेना की ट्रक के नीचे आकर मर गया
पहले की लाश आई तिरंगे में लिपटी
और दुसरे की पड़ी है
अभी तक सड़क पर
पुलिस हाथ नहीं लगाने देती
शहीद हुआ है सीमा पर
और दूसरी ख़बर भी थी
की काम वाली बाई का बेटा
सेना की ट्रक के नीचे आकर मर गया
पहले की लाश आई तिरंगे में लिपटी
और दुसरे की पड़ी है
अभी तक सड़क पर
पुलिस हाथ नहीं लगाने देती
विधवा का इन्तेकाम
उसने अपने पति की लाश देखी
फ़िर अपने बच्चों की तरफ़
रोती हुई बच्ची को एक
ज़ोर का थप्पड़ लगाया
और चिल्लाई
'सब क्यों नहीं मर गए इसी के साथ'
फ़िर अपने बच्चों की तरफ़
रोती हुई बच्ची को एक
ज़ोर का थप्पड़ लगाया
और चिल्लाई
'सब क्यों नहीं मर गए इसी के साथ'
परछाईं का बदला
सुबह की धुप से बनती परछाईं
मुझे डरा रह थी
रात को तो ये मेरी हमसफ़र थी
जब मैं अकेला था
ये गई नहीं थी
जब मैंने इसे लात मारी थी
कल रात तो खूब खेली थी मेरे साथ
कभी कुत्ता बनती कभी चिड़िया
अब दिन में ये औरों जैसी क्यों दिख रही है
शायद कल की लात का दर्द गया नहीं
बदला ले रही है मुझसे
मुझे डरा रह थी
रात को तो ये मेरी हमसफ़र थी
जब मैं अकेला था
ये गई नहीं थी
जब मैंने इसे लात मारी थी
कल रात तो खूब खेली थी मेरे साथ
कभी कुत्ता बनती कभी चिड़िया
अब दिन में ये औरों जैसी क्यों दिख रही है
शायद कल की लात का दर्द गया नहीं
बदला ले रही है मुझसे
फूल और कांटे
वो बैंगनी फूल जो मैं रोज़ तुम्हारे
बालों में लगाया करता था
वो फूल जिसे लेने मैं
रोज़ चार मील चलकर
रेलवे लाइन के उस पार जाता था
वही फूल जो मुरझाएं न
ये सोचकर
उन्हें पानी की बोतल में रख कर लाता था
जिन्हें देख कर तुम हंसती थी
बच्चों की तरह
उसके कांटे निकाल नहीं पाया
आजतक अपने हाथों से
वहीँ धंसे पड़े हैं
बालों में लगाया करता था
वो फूल जिसे लेने मैं
रोज़ चार मील चलकर
रेलवे लाइन के उस पार जाता था
वही फूल जो मुरझाएं न
ये सोचकर
उन्हें पानी की बोतल में रख कर लाता था
जिन्हें देख कर तुम हंसती थी
बच्चों की तरह
उसके कांटे निकाल नहीं पाया
आजतक अपने हाथों से
वहीँ धंसे पड़े हैं
नया बाज़ार
आज फ़िर एहसास हुआ की वक्त आ गया है
अपनी दुकान कहीं और लगाने का
मगर किसी ने पीछे से आवाज़ दी
पलट कर देखा तो ये वही था
जिसने मुझे गुर सिखाये थे दुकानदारी के
हँस रहा था मुझपर
थोड़ा पास आकर कहा की धंधे के कच्चे निकले तुम
नुकसान अब नहीं सम्भाल पाओगे
बंद कर दो ये दुकान
सामान सब पुराने हैं तुम्हारे पास
तुम्हारे खरीददार अब बचे नहीं ज़्यादा
मैंने अपनी बात मान ली
सोचा कल से फ़िर नया सामान जमा करूंगा
कल से फ़िर एक नया बाज़ार खोजूंगा
अपनी दुकान कहीं और लगाने का
मगर किसी ने पीछे से आवाज़ दी
पलट कर देखा तो ये वही था
जिसने मुझे गुर सिखाये थे दुकानदारी के
हँस रहा था मुझपर
थोड़ा पास आकर कहा की धंधे के कच्चे निकले तुम
नुकसान अब नहीं सम्भाल पाओगे
बंद कर दो ये दुकान
सामान सब पुराने हैं तुम्हारे पास
तुम्हारे खरीददार अब बचे नहीं ज़्यादा
मैंने अपनी बात मान ली
सोचा कल से फ़िर नया सामान जमा करूंगा
कल से फ़िर एक नया बाज़ार खोजूंगा
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