About Me

I am not just what I am.Most of the times I am someone else and rest of the times I pretend to be myself.It is impossible for me to find whether I am someone else or I am pretending to be myself.some people think what they want to think about me and some people think what I want them to think about me.But no one thinks about who really I am.Not even myself.I am a nonconformist and love to be dramatic.......(aisa hi kuchh likhte hain na?) wah!!!kya likha hai...

Friday, June 27, 2008

I could not make them bigger.....

1. एक मो़र का पंख जो कभी किताब के बीच में रखा था मैंने
रोज़ देखता हूँ की कहीं वो एक से दो तो नहीं हो गया
इसी फिराक़ में बाज़ार से कई और नई किताबें खरीद लाया हूँ मैं .

2.वोह जो फटी हुई चादर मैंने बरसो से संभल कर राखी थी
शायद कहीं खो गई
माँ ने पैबंद लगा दिए हैं उसपर .

Tuesday, June 10, 2008

please help!!!!!

वो जो था हमारे बीच उसे मैं क्या नाम दूँ ?

दुश्मनी कहूं तो नाइंसाफी होगी ,

कहूं उसे दोस्ती तो बदगुमानी होगी ,

तुम कह दो तो मैं तुम्हे अपनी हर सुबह हर शाम दूँ ,

मगर बताओ वो जो था हमारे बीच उसे मैं क्या नाम दूँ ।

मैं कह गया सब कुछ मगर तुमने जैसे सुना ही नहीं ,

इंकार ही कर देते मगर तुमने कुछ कहा ही नहीं ,

अब तुम्हे याद करने के सिवा इस दिल को और क्या काम दूँ ,

वो जो था हमारे बीच उसे मैं क्या नाम दूँ ?

चटखने की आवाज़ आई , दिल टूटा था शायद ,

आंसू आए मगर उसने गिरने नहीं दिया ,

मुस्कुराता चला गया था वो ,

ये सोचकर की एक नई कहानी बनूंगा ,

मगर जाता कहाँ कमबख्त ,

फ़िर वहीँ आकर ठहरा ,

फ़िर चटखने की आवाज़ आई ,

शायद दिल टूटा था .

hangover

आँख खुली तो सूरज सर पे आ गया था ,

रात के सपने अभी भी आंखों पे तैर रहे थे ,

सबकुछ वोही था और रोज़ की तरह वो भी नहीं था ,

रोशनदान से आती धुप परछाईं सी बना रही थी ,

परछाईं से कुछ धड़कन की सी आवाज़ें आ रही थी ,

लगता था जैसे ज़िन्दगी सितार बजा रही हो ,

शाम हुई ,धुप गई ,परछाईं भी गई ,

लगा सितार के तार टूट गए .