Friday, June 27, 2008
I could not make them bigger.....
रोज़ देखता हूँ की कहीं वो एक से दो तो नहीं हो गया
इसी फिराक़ में बाज़ार से कई और नई किताबें खरीद लाया हूँ मैं .
2.वोह जो फटी हुई चादर मैंने बरसो से संभल कर राखी थी
शायद कहीं खो गई
माँ ने पैबंद लगा दिए हैं उसपर .
Tuesday, June 10, 2008
please help!!!!!
वो जो था हमारे बीच उसे मैं क्या नाम दूँ ?
दुश्मनी कहूं तो नाइंसाफी होगी ,
कहूं उसे दोस्ती तो बदगुमानी होगी ,
तुम कह दो तो मैं तुम्हे अपनी हर सुबह हर शाम दूँ ,
मगर बताओ वो जो था हमारे बीच उसे मैं क्या नाम दूँ ।
मैं कह गया सब कुछ मगर तुमने जैसे सुना ही नहीं ,
इंकार ही कर देते मगर तुमने कुछ कहा ही नहीं ,
अब तुम्हे याद करने के सिवा इस दिल को और क्या काम दूँ ,
hangover
आँख खुली तो सूरज सर पे आ गया था ,
रात के सपने अभी भी आंखों पे तैर रहे थे ,
सबकुछ वोही था और रोज़ की तरह वो भी नहीं था ,
रोशनदान से आती धुप परछाईं सी बना रही थी ,
परछाईं से कुछ धड़कन की सी आवाज़ें आ रही थी ,
लगता था जैसे ज़िन्दगी सितार बजा रही हो ,
शाम हुई ,धुप गई ,परछाईं भी गई ,
लगा सितार के तार टूट गए .