सुना था तुमने
वो क्या कह गयी थी
पहले भी कई बार
उसने कहा था मुझसे
आंसूं भरी आँखों से
मैंने कोशिश की थी
आज भी
आंसूं देखने की
मगर वो वहां थे नहीं
या मैं देख नहीं पाया
चश्मा जो था
उसकी आँखों पे
लेकिन चश्मा तो वहीँ होता था
पहले भी
हाथ तो उसने छुड़ाया था
पहले भी कई बार
फिर क्यों आज ही
कुछ छूटता लग रहा था
पहले भी कई बार
तोडा था मैंने उम्मीदों को
फिर क्यों आज ही
कुछ टूटता लग रहा था
जिस दीवार को कुरेद कुरेद कर
सेंध लगायी थी मैंने
वो आज मजबूत हो गयी थी
मेरी उँगलियों से
निकलता खून
क्यों आज उसे दिखता नहीं
पहले काँटा भी चुभे तो
आसमान सर पर होता था
हमेशा उसने मुझे संभाला था
बच्चों जैसे
अगर मैं थोड़ा भी उदास होता था
फिर आज कैसे
मुझे रोता छोड़कर निकल गयी वो
कहा तो था उसने कुछ
लेकिन पता नहीं क्यों
मैं आज भी कुछ नहीं सुन पाया
वो क्या कह गयी थी
पहले भी कई बार
उसने कहा था मुझसे
आंसूं भरी आँखों से
मैंने कोशिश की थी
आज भी
आंसूं देखने की
मगर वो वहां थे नहीं
या मैं देख नहीं पाया
चश्मा जो था
उसकी आँखों पे
लेकिन चश्मा तो वहीँ होता था
पहले भी
हाथ तो उसने छुड़ाया था
पहले भी कई बार
फिर क्यों आज ही
कुछ छूटता लग रहा था
पहले भी कई बार
तोडा था मैंने उम्मीदों को
फिर क्यों आज ही
कुछ टूटता लग रहा था
जिस दीवार को कुरेद कुरेद कर
सेंध लगायी थी मैंने
वो आज मजबूत हो गयी थी
मेरी उँगलियों से
निकलता खून
क्यों आज उसे दिखता नहीं
पहले काँटा भी चुभे तो
आसमान सर पर होता था
हमेशा उसने मुझे संभाला था
बच्चों जैसे
अगर मैं थोड़ा भी उदास होता था
फिर आज कैसे
मुझे रोता छोड़कर निकल गयी वो
कहा तो था उसने कुछ
लेकिन पता नहीं क्यों
मैं आज भी कुछ नहीं सुन पाया
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