कल रात ही इसे अपनी आँखों में बंद किया था
सोने के ठीक पहले,
आज फिर वो आसमान में कैसे पहुँच गया
लगता है आज शाम मेरी आँखों से जो गिरा
वो आँसूं नहीं चाँद ही था
लेकिन वो तो उस बक्से में गिरा होगा
जिसमें मैंने तुम्हारी तसवीरें रखी थीं
लगता है पागल हो गए हैं सब
जो उस बहुरूपिये को चाँद कह रहे हैं
उसे तो मैंने तुम्हारी तस्वीरों के साथ ही बंद किया था
बक्से से धुंआ निकलते भी मैंने देखा था आज शाम
तसवीरें जल गयी होंगे ये सोच कर
बक्सा भी खोला था मैंने
वहां राख़ थी, हाँ सच कह रहा हूँ
वो भी जल गया था तुम्हारी तस्वीरों के साथ
फिर वो कौन है ढोंगी जो ऊपर चाँद बना बैठा है
रौशनी तो इसकी भी तुम्हारी आँखों जैसी ही है
चलो आज फिर सोता हूँ
इसे अपनी आँखों में बंद कर के
और कल गिरने नहीं दूंगा इसे
तुम कितनी भी कोशिश कर लो
कल गिरने नहीं दूंगा इसे आँखों से। ...
सोने के ठीक पहले,
आज फिर वो आसमान में कैसे पहुँच गया
लगता है आज शाम मेरी आँखों से जो गिरा
वो आँसूं नहीं चाँद ही था
लेकिन वो तो उस बक्से में गिरा होगा
जिसमें मैंने तुम्हारी तसवीरें रखी थीं
लगता है पागल हो गए हैं सब
जो उस बहुरूपिये को चाँद कह रहे हैं
उसे तो मैंने तुम्हारी तस्वीरों के साथ ही बंद किया था
बक्से से धुंआ निकलते भी मैंने देखा था आज शाम
तसवीरें जल गयी होंगे ये सोच कर
बक्सा भी खोला था मैंने
वहां राख़ थी, हाँ सच कह रहा हूँ
वो भी जल गया था तुम्हारी तस्वीरों के साथ
फिर वो कौन है ढोंगी जो ऊपर चाँद बना बैठा है
रौशनी तो इसकी भी तुम्हारी आँखों जैसी ही है
चलो आज फिर सोता हूँ
इसे अपनी आँखों में बंद कर के
और कल गिरने नहीं दूंगा इसे
तुम कितनी भी कोशिश कर लो
कल गिरने नहीं दूंगा इसे आँखों से। ...
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