क्या मानव का मानवता से कोई सम्बन्ध नहीं
क्या ये शब्द मानव की त्रुटियां मात्र दर्शाता है
भूखे, नंगे, पागल, चोर, क़ातिल
क्या ये ही मानव हैं
अपनी बर्बरता को अपने परिधान से छुपाते
क्या ये ही मानव हैं
दूसरो की रोटी छिनकर अपनी भूख मिटाते
क्या ये ही मानव हैं
दुःख, खुशी, आँसू, हँसी सबकुछ बेचते
क्या ये ही मानव हैं
डरे हुए, भागते हुए, रोते हुए, बीमार, मरते हुए
क्या ये ही मानव हैं
गंदी मानसिकता वाले, हवस से भरे, सड़े-गले
क्या ये ही मानव हैं
घिन्न आती है साँस लेते हुए भी
ये सोचकर की मैं भी इनमें से ही एक हूँ
ये भी तो हो सकता है की मैं अलग हूँ
फ़िर मैं कौन हूँ
क्या मैं मानव नहीं
मैं मानव हूँ इसका प्रमाण क्या है
क्या बिना प्रमाण के सत्य सत्य नहीं होता
Thursday, July 23, 2009
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