जब भी तुम साथ होती हो
तो सोचता हूँ
की किसको धोखा दे रहा हूँ
तुम्हें या ख़ुद को
या उस भरोसे को जो मुझे
ख़ुद पे कभी था ही नहीं
या उन सितारों को जो
रात भर मुझसे बातें करते थे
धोखा तो मैं अपनी उस
तन्हाई को भी दे रहा हूँ
जो हमेशा मेरे साथ रहती थी
जब भी तुम साथ होती हो
तो सोचता हूँ
की तुम क्यों मेरे साथ नहीं
तुम्हें क्यों पता नहीं
की क्या है मेरे दिल में
मुझे देखती हो फिर भी क्यों
तुमें कुछ नज़र नहीं आता
मुझसे बात करती हो फिर भी क्यों
तुम्हें कुछ सुनाई नहीं देता
जब भी तुम साथ होती हो
तो सोचता हूँ
मेरा किरदार लिखा ही क्यों गया
तुम्हारी कहानी में
अब लिख ही दिया तो
इतनी देर क्यों लगी
मुझे तुम तक आने में
ये गलती है लिखनेवाले की
फ़िर क्यों वो सज़ा मुझको दे रहा है
जब भी तुम साथ होती हो
तो सोचता हूँ
की कुछ न सोचूं
मगर फिर सोचता हूँ
की बोलें भी ना सोचें भी ना
तुम्हारे बाप का राज है क्या?
तो सोचता हूँ
की किसको धोखा दे रहा हूँ
तुम्हें या ख़ुद को
या उस भरोसे को जो मुझे
ख़ुद पे कभी था ही नहीं
या उन सितारों को जो
रात भर मुझसे बातें करते थे
धोखा तो मैं अपनी उस
तन्हाई को भी दे रहा हूँ
जो हमेशा मेरे साथ रहती थी
जब भी तुम साथ होती हो
तो सोचता हूँ
की तुम क्यों मेरे साथ नहीं
तुम्हें क्यों पता नहीं
की क्या है मेरे दिल में
मुझे देखती हो फिर भी क्यों
तुमें कुछ नज़र नहीं आता
मुझसे बात करती हो फिर भी क्यों
तुम्हें कुछ सुनाई नहीं देता
जब भी तुम साथ होती हो
तो सोचता हूँ
मेरा किरदार लिखा ही क्यों गया
तुम्हारी कहानी में
अब लिख ही दिया तो
इतनी देर क्यों लगी
मुझे तुम तक आने में
ये गलती है लिखनेवाले की
फ़िर क्यों वो सज़ा मुझको दे रहा है
जब भी तुम साथ होती हो
तो सोचता हूँ
की कुछ न सोचूं
मगर फिर सोचता हूँ
की बोलें भी ना सोचें भी ना
तुम्हारे बाप का राज है क्या?
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