About Me

I am not just what I am.Most of the times I am someone else and rest of the times I pretend to be myself.It is impossible for me to find whether I am someone else or I am pretending to be myself.some people think what they want to think about me and some people think what I want them to think about me.But no one thinks about who really I am.Not even myself.I am a nonconformist and love to be dramatic.......(aisa hi kuchh likhte hain na?) wah!!!kya likha hai...

Wednesday, December 31, 2008

happy new year

हैप्पी न्यू इयर!हैप्पी न्यू इयर
सिग्नल पर सुनाई दिया
भीख मांगते कुछ बच्चे
शोर मचा रहे थे
उन फटे कपडों में भागते
गंदे बच्चों को देख कर
लम्बी गाड़ी वाली मैडम ने
खिड़की का कांच ऊपर कर लिया
मैं भी सोच में पड़ गया
की साल बदलने से अचानक
इन अभागो की ज़िन्दगी में
कौन सी ख़ुशी आ गई
इन लावारिसों को क्या फर्क पड़ता है
सन्डे हो मंडे हो या न्यू इयर
हर दिन भीख ही तो मांगना है
इनकी दिवाली दशहरा और न्यू इयर
सब उस दिन होते होंगे
जिस दिन इनका पेट भरता होगा
इन्हें क्यों ख़ुशी हो रही है
सिर्फ़ तारीख ही तो बदल रही है
वैसे मेरे या किसी के ऐतराज़ करने से
उनकी ख़ुशी पर कोई फर्क नहीं पड़ना
और किसी को क्या हक़ है ऐतराज़ करने का
हरी बत्ती जलने पर जब लम्बी गाड़ी
आगे बढ़ी तब मैडम ने
शीशा निचे करके ताज़ा साँस ली
जैसे उन गंदे बच्चों ने
हवा भी गन्दा कर रखा था
जैसे वो गन्दा करते हैं समाज को
मैं जा नहीं पाया
वहीँ खड़ा रहा सड़क के किनारे
घंटो खड़ा रहा मगर
समझ नहीं पाया की ये बच्चे
खुस्श क्यों हैं ......
घर पंहुचा तो घर में भी
सब मना रहे थे जश्न नए साल का
मैं फ़िर नहीं समझ पा रहा था
की सब इतना खुश क्यों हैं

Monday, December 1, 2008

पागल.......

कल शाम देर से आए थे तुम
मैं नाराज़ बैठी थी
तुम चाय बनाओगे मेरे लिए
ऐसा कहा था
और फिर चाय जलने की बदबू पर
हसी थी मैं
अभी तक जला बर्तन गन्दा पड़ा है
कल रात तुमसे बातें
करते करते नींद आ गई थी मुझे
फिर तुमने मुझे डांटा था
और नाराज़ होकर कहा था
की कभी बात नहीं करोगे
फिर मैंने फिल्मों की तरह
गाना गाकर मनाया था तुम्हें
तुमने मेरे बाल खीचे थे
अभी तक दर्द हो रहा है
मेरे सोने के बाद तुमने
सिगरेट पी थी रोज़ की तरह
जला हुआ टुकडा अभी भी
छत के कोने में पड़ा है
सुबह सुबह बेसुरा गाना गाकर
तुमने मेरी नींद ख़राब की थी आज
मैंने गुस्से में तुम्हें
जले हुए ब्रेड खिलाये थे
फ़िर तुम आज भी देर से ऑफिस गए
बिना रुमाल लिए रोज़ की तरह
तुम्हारे आने का वक़्त हो रहा है
और ये TV वाले भी न
पागल हो गए हैं शायद
कल से ही हमले में मरनेवालों
में तुम्हारी तस्वीर दिखा रहे हैं
अम्मा भी कल से बेहोश पड़ी है
बाबूजी भी बताते नहीं की
उन्होंने अपने बाल क्यों मुडा लिए
अब तुम ही आकर बताओ इन्हें
की कल आए थे तुम