फिर सूरज निकलेगा थोड़ी देर में
थोड़ी देर में फिर सहर होगी
सबके हिस्से आएगी सुबह
हमारे हाथ फिर ख़ाली दोपहर होगी
आदतन फिर रुसवा होंगे भरी महफ़िल में
शर्त ये है की वो महफ़िल तेरे घर होगी
जिंदा रहने या न रहने में फर्क नहीं अब
फर्क कोई करे तो
वो बस तेरी एक नज़र होगी
सुना है सबकी मौत का एक वक़्त मुक़र्रर है
मर जाऊं वक़्त के पहले
गर मेरी कब्र तेरी रहगुज़र होगी
थोड़ी देर में फिर सहर होगी
सबके हिस्से आएगी सुबह
हमारे हाथ फिर ख़ाली दोपहर होगी
आदतन फिर रुसवा होंगे भरी महफ़िल में
शर्त ये है की वो महफ़िल तेरे घर होगी
जिंदा रहने या न रहने में फर्क नहीं अब
फर्क कोई करे तो
वो बस तेरी एक नज़र होगी
सुना है सबकी मौत का एक वक़्त मुक़र्रर है
मर जाऊं वक़्त के पहले
गर मेरी कब्र तेरी रहगुज़र होगी
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