तुम खूबसूरत लगती हो
जब भी तुम हँसती हो
लगता है जैसे एक साथ
हजारों बच्चे खिल खिला के हँसे हों
सर्कस के जोकर के खेल पे
जैसे सूखे पड़े खेत में
बारिश की पहली बूँद देख कर
खुशी आती है किसानों के मुँह पे
तुम खूबसूरत लगती हो
तब भी जब तुम उदास होती हो
जैसे सांझ ढल रही हो
और चरवाहे की गायें
सरहद पार चली गयीं हों
जैसे पतझड़ की उमस भरी दोपहरी में
हाथ दुःख गए हों पंखा झलते झलते
जैसे सारे गुलाब मुरझा गए हों
सूरज की तपती रौशनी में
तुम खूबसूरत लगती हो
जब भी तुम मुझसे बातें करती हो
लगता है किसी शराबी आशिक ने
बोतल मुँह से लगा ली हो
लगता है जैसे बाँध तोड़ कर
नदी घुस गई हो गाँव में
लगता है जैसे किसी बच्चे को
मनचाहा खिलौना मिल गया हो
तुम खूबसूरत लगती हो
तब भी जब तुम मुझसे बात नहीं करती हो
लगता है समंदर ने कई राज़ छुपा रखे हों
लगता है पेड़ इंतज़ार कर रहे हों
आंधी का झुमने के लिए
लगता है समय भी चलना छोड़कर
तुम्हारे बोलने का इंतज़ार कर रहा हो
तुम खूबसूरत लगती हो
जब भी तुम मुझे देखती हो
ऐसा लगता है जैसे उडती हुई पतंग
जानना चाहती हो की
उसकी डोर किसने थाम रखी है
जैसे सर्दियों में धुप आती है
घर के आँगन में
जैसे रात के अंधेरे में राही को
दूर कहीं जलता हुआ दीया दिखा हो
तुम खूबसूरत लगती हो
तब भी जब तुम मुझे नहीं देखती
लगता है जैसे पूनम की रात में
चाँद ने रौशनी देने से मना कर दिया हो
जैसे थके हारे किसान की बीवी ने
उसे रोटी न दिया हो
जैसे माँ ने थप्पड़ लगाया हो
अँधेरा होने के बाद भी गली में खेलते
अपने बच्चे को
तुम खूबसूरत ही लगोगी
तब भी जब मैं तुम्हें देख नहीं पाऊंगा
रेगिस्तान की तरह
जहाँ सिर्फ़ सुनहरी रेत दिखाई देती है
मैं तुम्हें तलाश करूँगा और तुम दिखोगी
दूर कहीं ठंडे पानी की झील की तरह
जो वहां होती ही नहीं
जब भी तुम हँसती हो
लगता है जैसे एक साथ
हजारों बच्चे खिल खिला के हँसे हों
सर्कस के जोकर के खेल पे
जैसे सूखे पड़े खेत में
बारिश की पहली बूँद देख कर
खुशी आती है किसानों के मुँह पे
तुम खूबसूरत लगती हो
तब भी जब तुम उदास होती हो
जैसे सांझ ढल रही हो
और चरवाहे की गायें
सरहद पार चली गयीं हों
जैसे पतझड़ की उमस भरी दोपहरी में
हाथ दुःख गए हों पंखा झलते झलते
जैसे सारे गुलाब मुरझा गए हों
सूरज की तपती रौशनी में
तुम खूबसूरत लगती हो
जब भी तुम मुझसे बातें करती हो
लगता है किसी शराबी आशिक ने
बोतल मुँह से लगा ली हो
लगता है जैसे बाँध तोड़ कर
नदी घुस गई हो गाँव में
लगता है जैसे किसी बच्चे को
मनचाहा खिलौना मिल गया हो
तुम खूबसूरत लगती हो
तब भी जब तुम मुझसे बात नहीं करती हो
लगता है समंदर ने कई राज़ छुपा रखे हों
लगता है पेड़ इंतज़ार कर रहे हों
आंधी का झुमने के लिए
लगता है समय भी चलना छोड़कर
तुम्हारे बोलने का इंतज़ार कर रहा हो
तुम खूबसूरत लगती हो
जब भी तुम मुझे देखती हो
ऐसा लगता है जैसे उडती हुई पतंग
जानना चाहती हो की
उसकी डोर किसने थाम रखी है
जैसे सर्दियों में धुप आती है
घर के आँगन में
जैसे रात के अंधेरे में राही को
दूर कहीं जलता हुआ दीया दिखा हो
तुम खूबसूरत लगती हो
तब भी जब तुम मुझे नहीं देखती
लगता है जैसे पूनम की रात में
चाँद ने रौशनी देने से मना कर दिया हो
जैसे थके हारे किसान की बीवी ने
उसे रोटी न दिया हो
जैसे माँ ने थप्पड़ लगाया हो
अँधेरा होने के बाद भी गली में खेलते
अपने बच्चे को
तुम खूबसूरत ही लगोगी
तब भी जब मैं तुम्हें देख नहीं पाऊंगा
रेगिस्तान की तरह
जहाँ सिर्फ़ सुनहरी रेत दिखाई देती है
मैं तुम्हें तलाश करूँगा और तुम दिखोगी
दूर कहीं ठंडे पानी की झील की तरह
जो वहां होती ही नहीं
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