तुम्हारी एक झलक के लिए
हमने क्या क्या नहीं किया
बचपन में सर्दियों में भी
तुम्हारे घर के सामने वाले पेड़ से
आम तोड़े
जवानी आयी तो तुम्हारी कसम
तुम्हें नहीं पता हमने
कितने जरूरी काम छोड़े
हमें ज़रा भी ठण्ड नहीं लगती थी
जब एक बार भी तुम्हारी आवाज़
ठन्डी दीवार से सटी मेरी कान
चूम जाया करती थी
हमें तकलीफ नहीं होती थी
जब सतरह किलोमीटर दूर से भी
तुम्हारी हंसी सुन के हमारी बाइक
घूम जाया करती थी
ये तो याद होगा की
तुम्हें एक बार मिलने को
मैं तीन रातों तक जागा था
मगर ये याद नहीं होगा की
तुम्हें एक बार मिलने को
मैं भरी दोपहरी
नंगे पाँव भी भागा था
अब न मिलना कभी
अगर कहीं मिल गयी
तो माँ कसम मुँह तोड़ देंगे!!!!!!!
हमने क्या क्या नहीं किया
बचपन में सर्दियों में भी
तुम्हारे घर के सामने वाले पेड़ से
आम तोड़े
जवानी आयी तो तुम्हारी कसम
तुम्हें नहीं पता हमने
कितने जरूरी काम छोड़े
हमें ज़रा भी ठण्ड नहीं लगती थी
जब एक बार भी तुम्हारी आवाज़
ठन्डी दीवार से सटी मेरी कान
चूम जाया करती थी
हमें तकलीफ नहीं होती थी
जब सतरह किलोमीटर दूर से भी
तुम्हारी हंसी सुन के हमारी बाइक
घूम जाया करती थी
ये तो याद होगा की
तुम्हें एक बार मिलने को
मैं तीन रातों तक जागा था
मगर ये याद नहीं होगा की
तुम्हें एक बार मिलने को
मैं भरी दोपहरी
नंगे पाँव भी भागा था
अब न मिलना कभी
अगर कहीं मिल गयी
तो माँ कसम मुँह तोड़ देंगे!!!!!!!
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