वो आवारा मनचला आज फिर मिला था मुझको
अरे वही जो कपडे तो अच्छे पहनता है
मगर बातें पागलों जैसी करता है
मिलता है मुझे, कभी कभी यूँ ही
रात में अकेले सड़कों पर भटकता हुआ
या कभी किसी चौराहे पर
अकेले बैठा सिगरेट पिता हुआ
देख कर लगता है की उसे पता ही नहीं
की किस रस्ते जाना है
मैंने करीब से तो नहीं देखा
मगर आँखें उसकी हिलती नहीं
एक टक देखता रहता है
जैसे अब उसे किसी का इंतज़ार नहीं
तलाश ख़तम हो गयी हो उसकी अँधेरे में
पागल लगता तो नहीं
मगर बातें पागलों जैसी ही करता है
आज मिला था वहीँ
काका के पान दूकान के पीछे
मैंने सिगरेट बढ़ाई तो बोला
"गुलाब ख़ूबसूरत तो होता है
मगर बातें पागलों जैसी करता है
मिलता है मुझे, कभी कभी यूँ ही
रात में अकेले सड़कों पर भटकता हुआ
या कभी किसी चौराहे पर
अकेले बैठा सिगरेट पिता हुआ
देख कर लगता है की उसे पता ही नहीं
की किस रस्ते जाना है
मैंने करीब से तो नहीं देखा
मगर आँखें उसकी हिलती नहीं
एक टक देखता रहता है
जैसे अब उसे किसी का इंतज़ार नहीं
तलाश ख़तम हो गयी हो उसकी अँधेरे में
पागल लगता तो नहीं
मगर बातें पागलों जैसी ही करता है
आज मिला था वहीँ
काका के पान दूकान के पीछे
मैंने सिगरेट बढ़ाई तो बोला
"गुलाब ख़ूबसूरत तो होता है
मगर उसकी टहनी छाया नहीं देती
जानते हो क्यों?
क्योंकि छाया देना उसका काम नहीं
उसका काम तो बस ख़ूबसूरत लगना है."
और निकल गया सिगरेट जला के
मैंने काका से पुछा की कौन है वो
काका ने भी अजीब जवाब दिया
"साब कपडे तो अच्छे पहनते हो
मगर बातें रोज़ पागलों जैसी करते हो."
और निकल गया सिगरेट जला के
मैंने काका से पुछा की कौन है वो
काका ने भी अजीब जवाब दिया
"साब कपडे तो अच्छे पहनते हो
मगर बातें रोज़ पागलों जैसी करते हो."
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