लाश का वजन ज्यादा नहीं होता
हाँ मगर कन्धों पर बोझ ज़्यादा लगता है
तुम्हें पता ही नहीं होगा
की लाश कंधे पे उठाये फिरना थका देता है
"तुम" से ये न समझना
की मेरा मतलब "तुम" से था
"तुम" से मेरा मतलब
इस लाश से था
जो उतरती नहीं मेरे कन्धों से
ये न बोलती है न हँसती है
न मुझे रुकने को कहती है
न ही मुझे चलने को कहती है
हाँ शिकायत भी नहीं करती अब तो
चलती रहती है मेरे साथ हमेशा
बस उतरती नहीं लेकिन
मेरी ज़िन्दगी आगे जाती है
या पीछे, मैं समझ ही नहीं पाया कभी
शायद ये थोड़ी आगे चल के
वापस पीछे चली जाती है
हाँ सही तो है
वापस पीछे ही चली जाती है
तंग आकर कुछ दिनों पहले
उतार फेंका था इस लाश को
अपने कन्धों से
ये दूर बैठी हंसती थी मुझपे
और हँसते हुए पहली बार
इसने मुझसे कुछ कहा
की तुम मैं हूँ और मैं तुम
बाकी सब साली बातें हैं
लोग कहते हैं और भूल जाते हैं
तू कितनी भी रौशनी कर ले
तेरे हिस्से तो सिर्फ रातें हैं
मैंने भी एक बार वाह! वाह! कहा
और वापस उठा लिया
उसे अपने कन्धों पर
अब ये फिर कुछ नहीं बोलती
हाँ मगर
मेरे साथ चलती है
हाँ मगर कन्धों पर बोझ ज़्यादा लगता है
तुम्हें पता ही नहीं होगा
की लाश कंधे पे उठाये फिरना थका देता है
"तुम" से ये न समझना
की मेरा मतलब "तुम" से था
"तुम" से मेरा मतलब
इस लाश से था
जो उतरती नहीं मेरे कन्धों से
ये न बोलती है न हँसती है
न मुझे रुकने को कहती है
न ही मुझे चलने को कहती है
हाँ शिकायत भी नहीं करती अब तो
चलती रहती है मेरे साथ हमेशा
बस उतरती नहीं लेकिन
मेरी ज़िन्दगी आगे जाती है
या पीछे, मैं समझ ही नहीं पाया कभी
शायद ये थोड़ी आगे चल के
वापस पीछे चली जाती है
हाँ सही तो है
वापस पीछे ही चली जाती है
तंग आकर कुछ दिनों पहले
उतार फेंका था इस लाश को
अपने कन्धों से
ये दूर बैठी हंसती थी मुझपे
और हँसते हुए पहली बार
इसने मुझसे कुछ कहा
की तुम मैं हूँ और मैं तुम
बाकी सब साली बातें हैं
लोग कहते हैं और भूल जाते हैं
तू कितनी भी रौशनी कर ले
तेरे हिस्से तो सिर्फ रातें हैं
मैंने भी एक बार वाह! वाह! कहा
और वापस उठा लिया
उसे अपने कन्धों पर
अब ये फिर कुछ नहीं बोलती
हाँ मगर
मेरे साथ चलती है
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