डरते किस से हो
वो आवाजें जो तुम्हें परेशान करती हैं
वो तो चीखें हैं
डरे हुए बेचारे लोगों की
वो आँखें जो घूरती हैं तुम्हें
अँधेरे में चमकती हैं
उनके आंसुओं से
तुम उनसे डरते हो?
वो घबराये हुए लोग
दौड़ते हैं, तुम्हें हराने को नहीं
वो तो भाग रहे होते हैं
एक दुसरे पे चढ़ कर
खुद को बचाने के लिए
डरो और उस भीड़ का हिस्सा बन जाओ
या दूर करो उनके उस डर को
मगर वो फिर तुम्हें डरायेंगे
बेहतर येही है की
उनको भागने दो इस डर के साथ
तुम बिना टकराए कोई रास्ता बनाओ
और चलते जाओ
Sunday, January 3, 2010
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