About Me

I am not just what I am.Most of the times I am someone else and rest of the times I pretend to be myself.It is impossible for me to find whether I am someone else or I am pretending to be myself.some people think what they want to think about me and some people think what I want them to think about me.But no one thinks about who really I am.Not even myself.I am a nonconformist and love to be dramatic.......(aisa hi kuchh likhte hain na?) wah!!!kya likha hai...

Wednesday, May 28, 2008

Am I a good salesman?

फ़िर घुमते हुए कुछ और नए लोग मिले ,
कुछ सीधे सादे नादाँ थे , तो कुछ शातिर सौदागर ,
भीड़ दिखती थी सबसे ज़्यादा अपनी ही दुकान पर ,
मगर हिसाब ये कहता था की मैं सौदे करता हूँ सारे नुकसान पर ,
खुश था मैं फ़िर भी हिसाब में नुकसान ही दिखता था ,
अपने खर्चे पे इतनी रौशनी की थी की हर रास्ता आसान ही दिखता था ,
नादाँ समझते थे की मुझसा कोई शातिर नहीं ,
और शातिरों को ग़म था की उनका पला पड़ा है एक बेईमान से ,
कोई मेरे घर आता तो देखता की मैं जलाता हूँ अपना ही सामान ,
जो कभी लाया था बड़े अरमान से ,
उसी भीड़ में कुछ ऐसे समझदार भी थे जो दोस्त थे अपने ,
मगर वो भी क्या करते जब मैं देखता ही हूँ ग़लत सपने ,
मैं सही था या वो लोग ग़लत ,ये भी एक गुत्थी रही ,
और मुझको ही ग़लत साबित करती मेरी अपनी ही चुप्पी रही ,
अब तो वक्त आ गया अपनी दुकान कहीं और लगाने का ,
कुछ और नए लोगों के लिए कुछ और नया सामान लेन का ,
कोशिश करूंगा की अब नुकसान न हो ज़्यादा ,
या कोई हिस्सेदार मिल जाए जो बाँट ले नुकसान आधा -आधा ,
सौदा अगर एक से न पटे तो किसी और को आवाज़ लगाऊँगा ,
मगर मैंने भी कसम खायी है की अपनी दुकान ज़रूर चलाऊँगा .

2 comments:

Unknown said...

this one is the best of ur writings...
i liked it the most...
a classic piece..
n yess....apni dukaan zarur chalaana...!!!!haha...!!!

Divya said...

Management school kyon gaye tum sushant...dont waste ur time..u r such a good writer kuchh achha padhne ka haq hai sabka unko mauka to do yar