About Me

I am not just what I am.Most of the times I am someone else and rest of the times I pretend to be myself.It is impossible for me to find whether I am someone else or I am pretending to be myself.some people think what they want to think about me and some people think what I want them to think about me.But no one thinks about who really I am.Not even myself.I am a nonconformist and love to be dramatic.......(aisa hi kuchh likhte hain na?) wah!!!kya likha hai...

Wednesday, May 28, 2008

My daily routine

दिन गुजरा पीछा करते हुए
अपनी परछाईं का ,
शाम ढलते ही परछाईं भी डूब गई ,
गुज़र गई शाम रात के इंतज़ार में
रोज़ की तरह वो शाम भी हमारी खूब गई ।

रात होते ही महसूस हुआ की अँधेरा है ,
दिखता नहीं कुछ भी
इससे अच्छा तो अपना वोही पुराना सवेरा है ,
हार कर निकला मैं रौशनी की तलाश में ,
रौशनी मिली भी तो ऊपर आकाश में ,
जी तो चाह की एक तारा तोड़ लाऊं ,
मगर फ़िर ख्याल आया की ले तो आऊँ
पर अंधेरे में रास्ता किसे दिखाऊँ .
ढूँढा मगर कोई न मिला जिसे जरूरत हो अपनी ,
इस शहर में सबके पास हैं रोशनियाँ अपनी अपनी .
वापस आया उसी कमरे में अपने
गुज़र गई रात भी बस जागती आंखों से देखते सपने .

1 comment:

Divya said...

जी तो चाह की एक तारा तोड़ लाऊं ,
मगर फ़िर ख्याल आया की ले तो आऊँ
पर अंधेरे में रास्ता किसे दिखाऊँ

sach me..kya soch hai..ढूँढा मगर कोई न मिला जिसे जरूरत हो अपनी ,
इस शहर में सबके पास हैं रोशनियाँ अपनी अपनी .
वापस आया उसी कमरे में अपने
गुज़र गई रात भी बस जागती आंखों से देखते स