डूबते हुए सूरज से मैंने पूछा
फ़िर कब आओगे
जाऊँगा कहाँ
उसने कहा
जब भी आँखें खोलोगे
मुझे ही पाओगे
आँख खुली तो अँधेरा था
मैंने फ़िर पूछा
सब तो गए
अब क्या तुम भी छोड़ जाओगे
सूरज ने कहा
इस चाँद में भी मेरी ही रौशनी है
मुझसे बचकर कहाँ जाओगे
फ़िर मैंने तस्वीर से पूछा
जागते हुए दर्द देते हो
अब क्या सपनो में भी सताओगे
तस्वीर ने कहा
ख़ुद छोड़ गए अब रोते हो
मुझको तनहा करके
तुम भी बस तन्हाई ही पाओगे
Sunday, September 21, 2008
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