मैं कौन हूं पता है?
जो भी बुरा करता हूं, वो मैं हूं
जो भी बुरा बोलता हूँ, वो मैं हूं
जब किसी को रूलाता हूं
तो वो मैं होता हूं
जब किसी को सताता हूं
तो बस वो ही मैं होता हूं
बस यही मेरी पहचान है
मैं बस इतना ही हूं
जिसकी खुशी तुम्हारी हंसी से आती है
जिसकी सुबह तुम्हारे जागने से
और रात तुम्हारे सोने से होती है
जिसे लोगों के बीच सिर्फ
तुम्हारी ही आवाज़ सुनाई देती है
जिसकी ज़िंदगी तुम्हारे चारों ओर ही घूमती है
वो तो कोई और ही है ना
तो सही है ना
सज़ा तो मुझे ही मिलनी चाहिए
उस मैं को जो बुरा है
क्योंकि बस वही मैं हूँ
वो दुसरा मैं तो कोई और ही है ना
बताओ¶¶¶¶¶
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