उस रात मैं अपनी परछाई से बात कर रहा था
वो कुछ कह रही थी मैं बस सुन रहा था
वो कुछ टूटी कड़ियों को जोड़ रही थी
मैं बस देख रहा था
उसने यादो की एक ज़ंजीर मेरे गले में डालनी चाही
मगर वो बीच से टूट गई
शायद कोई कड़ी गुम थी
मैंने उठकर देखा तो आईने से मेरा अक्स गायब था
पलट कर देखा तो मैं नहीं
मेरा अक्स मेरी परछाईं से बातें कर रहा था
परछाईं कुछ कह रही थी और वो सुन रहा था .
Saturday, July 19, 2008
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1 comment:
today i came to know the difference between two things..
"waah waah" karna
aur
"waah waah" nikalna
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