1. एक मो़र का पंख जो कभी किताब के बीच में रखा था मैंने
रोज़ देखता हूँ की कहीं वो एक से दो तो नहीं हो गया
इसी फिराक़ में बाज़ार से कई और नई किताबें खरीद लाया हूँ मैं .
2.वोह जो फटी हुई चादर मैंने बरसो से संभल कर राखी थी
शायद कहीं खो गई
माँ ने पैबंद लगा दिए हैं उसपर .
Friday, June 27, 2008
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